भारतीय रेलवे के प्रीमियम कोच अब सुरक्षित नहीं रहे। हाल के दिनों में जोधपुर से जुड़ी विभिन्न ट्रेनों में चोरी की ऐसी वारदातें सामने आई हैं, जिन्होंने यात्रियों के भरोसे को हिला कर रख दिया है। मामला सिर्फ छोटी-मोटी चोरी का नहीं है, बल्कि लाखों रुपये के जेवरात और नकदी गायब हो रहे हैं, जबकि सुरक्षाकर्मी उन्हीं कोचों में मौजूद होते हैं। ट्रेन चोरी की ये घटनाएं दिखाती हैं कि चोरों के लिए रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था अब महज एक औपचारिकता बन गई है। (सोचिए, जिस AC कोच को हम सबसे सुरक्षित मानते हैं, वहां भी सोने की चेन गले से गायब हो जा रही है।)
सुरक्षा में बड़ी चूक: जोधपुर-कामाख्या एक्सप्रेस में सामूहिक लूट
सबसे हैरान करने वाली घटना ट्रेन संख्या 15623, जोधपुर-कामाख्या एक्सप्रेस में हुई। यह वारदात गुरुवार तड़के बरोनी और कटिहार स्टेशनों के बीच घटी। यहाँ चोरों ने एक साथ एक दर्जन से अधिक यात्रियों को अपना निशाना बनाया। कमाल की बात यह है कि यह सब AC 2-टियर कोच में हुआ, जहाँ सुरक्षा के कड़े दावे किए जाते हैं।
पीड़ितों में कमलेश कुमार और उनकी पत्नी शामिल थे, जिनके पर्स से नकदी, मोबाइल और कीमती गहने पार हो गए। वहीं, वाराणसी के रहने वाले केशव कुमार, जो सिलीगुड़ी जा रहे थे, ने बताया कि सोते समय उनके गले से सोने की चेन और वॉलेट चोरी हो गया। यात्रियों का गुस्सा सातवें आसमान पर है क्योंकि उनका आरोप है कि रेलवे पुलिस (RPF) की रात की गश्त पूरी तरह नदारद थी।
यात्रियों का कहना है कि हर स्टेशन पर अनधिकृत वेंडर्स और बिना टिकट यात्री कोच में बेखौफ अंदर आते हैं। यह स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब यात्री ऑनलाइन शिकायतें तो दर्ज कराते हैं, लेकिन जमीन पर सुरक्षा का कोई नामोनिशान नहीं दिखता। सच तो यह है कि चोर अब पुलिस की मौजूदगी से नहीं डरते।
सूर्य नगर एक्सप्रेस: ₹20 लाख के गहने और नकदी पार
एक और बड़ी वारदात सूर्य नगर एक्सप्रेस के AC कोच में हुई, जिसने सबको चौंका दिया। नवंबर 2025 में, बांद्रा से जोधपुर की यात्रा कर रहे यात्री नरेंद्र जैन के साथ एक बड़ी लूट हुई। जैन ने बताया कि उनके करीब 20 लाख रुपये मूल्य के सोने के गहने, 1 लाख रुपये नकद और एक आईफोन चोरी हो गया।
दिलचस्प बात यह है कि चोरी से ठीक पहले नरेंद्र जैन ने एक संदिग्ध व्यक्ति को देखा था, जो खुद को कोच अटेंडेंट बता रहा था लेकिन उसके पास केवल एक जनरल टिकट था। यह चोरी पाली और लुनी स्टेशनों के बीच हुई। इस घटना ने यह साबित कर दिया कि चोर अब रेलवे कर्मचारियों का भेष धरकर आसानी से यात्रियों को बेवकूफ बना रहे हैं। पीड़ित ने GRP जोधपुर में मामला दर्ज कराया है।
मंडोर एक्सप्रेस: विदेशी पर्यटकों को बनाया निशाना
6 अगस्त 2025 को मंडोर एक्सप्रेस में एक और शर्मनाक घटना घटी। दिल्ली से जोधपुर आ रही इस ट्रेन में जयपुर और जोधपुर के बीच दो विदेशी पर्यटकों और चार स्थानीय यात्रियों के बैग चोरी हो गए। चोरों ने करीब 2 लाख रुपये नकद, एप्पल एयरपॉड्स, एप्पल पेंसिल और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज उड़ा लिए।
इस मामले में सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ कि जब चोरी हो रही थी, तब फर्स्ट AC कोच में एक GRP कांस्टेबल मौजूद था। अब सवाल यह उठता है कि जब सुरक्षाकर्मी पास में था, तो चोर इतनी बड़ी लूट कैसे कर गए? इस मामले में जोधपुर रेलवे स्टेशन पर पांच जीरो-नंबर FIR दर्ज की गईं, जिन्हें बाद में जांच के लिए जयपुर GRP को भेजा गया।
प्रशासन की प्रतिक्रिया और विश्लेषण
इन वारदातों के बाद सीनियर डिविजनल कमर्शियल मैनेजर विकास खेड़ा ने स्टेशन का दौरा किया और पीड़ितों को भरोसा दिलाया कि चोर जल्द पकड़े जाएंगे। लेकिन क्या सिर्फ आश्वासनों से काम चलेगा?
- सुरक्षा अंतराल: AC कोच में बिना पहचान पत्र के लोगों का प्रवेश।
- पुलिस की लापरवाही: ड्यूटी पर तैनात होने के बावजूद चोरों का बेखौफ होना।
- सिस्टम की विफलता: जीरो-नंबर FIR का लंबा सिलसिला, जिससे जांच में देरी होती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि रेलवे को अब स्मार्ट सर्विलांस और बायोमेट्रिक एक्सेस जैसे विकल्पों पर विचार करना चाहिए, क्योंकि पारंपरिक गश्त अब नाकाम साबित हो रही है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
जोधपुर की ट्रेनों में चोरी की मुख्य वजह क्या है?
मुख्य वजहों में RPF की गश्त में कमी और कोचों में अनधिकृत व्यक्तियों का आसान प्रवेश शामिल है। यात्रियों के अनुसार, संदिग्ध लोग अटेंडेंट बनकर या वेंडर्स के रूप में ट्रेनों में घुस रहे हैं और सुरक्षाकर्मी उन्हें नहीं रोक रहे हैं।
सूर्य नगर एक्सप्रेस मामले में कितना नुकसान हुआ?
इस मामले में यात्री नरेंद्र जैन को करीब 20 लाख रुपये का नुकसान हुआ, जिसमें सोने के गहने, 1 लाख रुपये नकद और एक महंगा आईफोन शामिल था। यह चोरी पाली और लुनी स्टेशनों के बीच हुई थी।
मंडोर एक्सप्रेस में विदेशी पर्यटकों के साथ क्या हुआ?
मंडोर एक्सप्रेस में दो विदेशी पर्यटकों और चार स्थानीय लोगों के बैग चोरी हो गए, जिनमें 2 लाख रुपये नकद और एप्पल के महंगे गैजेट्स थे। सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि घटना के समय कोच में एक GRP कांस्टेबल मौजूद था।
अगर ट्रेन में चोरी हो जाए तो क्या करना चाहिए?
पीड़ितों को तुरंत रेलवे प्रशासन के हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करना चाहिए, ऑनलाइन शिकायत दर्ज करानी चाहिए और निकटतम GRP स्टेशन पर FIR दर्ज करानी चाहिए। यदि घटना दूसरे स्टेशन के क्षेत्र में हुई है, तो 'जीरो FIR' दर्ज कराई जा सकती है।
Suraj Narayan
हद हो गई यार! AC कोच में भी अब चैन से सोना मुमकिन नहीं है। प्रशासन को अब जागना होगा और इन चोरों की कमर तोड़नी होगी। बस आश्वासनों से काम नहीं चलेगा, सख्त एक्शन चाहिए!
Rashi Jain
इस तरह की वारदातों को रोकने के लिए हमें केवल पुलिस गश्त पर निर्भर नहीं रहना चाहिए बल्कि एक ऐसा इंटीग्रेटेड सिस्टम बनाना होगा जिसमें कोच के हर प्रवेश बिंदु पर बायोमेट्रिक या कम से कम डिजिटल वेरिफिकेशन हो, क्योंकि जैसा कि लेख में बताया गया है कि चोर अटेंडेंट का भेष धरकर आ रहे हैं तो यह स्पष्ट है कि वर्तमान पहचान पत्र प्रणाली पूरी तरह विफल हो चुकी है और जब तक हम तकनीक का सही समावेश नहीं करेंगे तब तक यात्रियों का सामान सुरक्षित नहीं रहेगा, साथ ही यात्रियों को भी अपने कीमती सामान के लिए लॉकर्स का उपयोग करना चाहिए जो स्टेशनों पर उपलब्ध होते हैं ताकि सफर के दौरान जोखिम कम हो सके।
Dr. Sanjay Kumar
वाह! क्या सुरक्षा है! कांस्टेबल पास में बैठा है और बगल से बैग गायब हो रहे हैं। इसे कहते हैं असली सिस्टम। हम तो बस टैक्स भरते रहें और चोर हमारा सामान ले जाते रहें। एकदम मज़ाक बना रखा है!
Arumugam kumarasamy
भारतीय रेल के इस गिरते स्तर के लिए केवल प्रशासन नहीं बल्कि यात्रियों की लापरवाही भी जिम्मेदार है। यदि व्यक्ति अपने गहने पहनकर यात्रा करता है, तो वह स्वयं चोरों को आमंत्रित कर रहा है। अनुशासन और सतर्कता ही एकमात्र समाधान है।
Robin Godden
हमें पूरा विश्वास है कि रेल मंत्रालय इस गंभीर समस्या का समाधान जल्द ही निकाल लेगा। प्रशासन की ईमानदारी पर भरोसा रखते हुए हम आशा करते हैं कि भविष्य में ऐसी घटनाएं नहीं होंगी।
Raman Deep
बहुत ही डरावना है ये सब 😱 ट्रेन में अब सोना भी मुश्किल हो गया है!! रेलवे को कुछ तो करना ही होगा यार 🙏
Mayank Rehani
यह पूरी तरह से 'operational failure' है। जब तक 'access control' और 'surveillance' का कोई ठोस 'framework' नहीं बनेगा, तब तक यह 'security breach' जारी रहेगा।
Anirban Das
सब बेकार है 🙄
Anamika Goyal
बेचारे वो यात्री जिनके गहने और पैसे चोरी हो गए। सोचकर ही दुख होता है कि इतनी मेहनत की कमाई एक पल में चली गई। क्या हम सच में सुरक्षित हैं?
Prathamesh Shrikhande
बहुत बुरा हुआ उनके साथ 😔 उम्मीद है उन्हें उनका सामान वापस मिल जाए ❤️
Priyank Prakash
अरे भाई! 20 लाख के गहने कौन ट्रेन में लेकर घूमता है? 😂 ये तो साफ़ है कि कुछ तो गड़बड़ है। मुझे तो लगता है ये सब नाटक है! 🙄
shrishti bharuka
वाह, कांस्टेबल पास में बैठा था! कितनी 'शानदार' सुरक्षा व्यवस्था है हमारी। सच में, चोरों को तो मेडल मिलना चाहिए कि उन्होंने पुलिस की नाक के नीचे इतनी सफाई से काम किया।
Senthilkumar Vedagiri
ये सब प्लानिंग है भाई! ऊपर से कह रहे है चोर पकड़े जाएंगे पर असल में ये अंदर के लोग ही कर रहे है। पुलिस तो बस ढोंग कर रही है ताकि हम चुप रहे और लूटे जाते रहे 😒
saravanan saran
जीवन की अनिश्चितता इस बात से भी झलकती है कि हम जिसे सुरक्षित समझते हैं, वही सबसे असुरक्षित निकलता है। भौतिक संपदा तो आती जाती है, पर विश्वास का टूटना ज्यादा दुखद है।
SAURABH PATHAK
भाई, सिंपल सी बात है। जब तक RPF वाले रिश्वत लेंगे, तब तक चोर ऐसे ही घूमेंगे। मुझे पता है ये सब कैसे काम करता है, बस तुम लोग भोले बने रहो।
Arun Prasath
मेरा सुझाव है कि यात्रियों को सामान की सुरक्षा के लिए केवल चेन लॉक पर निर्भर रहने के बजाय डिजिटल ट्रैकिंग डिवाइस का उपयोग करना चाहिए।
Priya Menon
मैं इस बात से पूरी तरह सहमत हूँ कि सुरक्षा व्यवस्था में भारी चूक हुई है। यह बेहद शर्मनाक है कि प्रीमियम कोच में भी लोग असुरक्षित महसूस कर रहे हैं और प्रशासन केवल खोखले आश्वासन दे रहा है।
Nikita Roy
सब ठीक हो जायेगा बस हिम्मत रखो
Jivika Mahal
यार ये तो बहुत ही बुरा हुआ! 😭 रेलवे को सच में अब कुछ करना चाहिए वरना कोई ट्रेन में जाने से डरेगा। हम सब मिलकर आवाज़ उठाएंगे तभी बदलाव आयेगा!
Kartik Shetty
औसत भारतीय की मानसिकता ही ऐसी है कि वह अंतिम क्षण तक सुरक्षा की चिंता नहीं करता और फिर सिस्टम को कोसता है। यह एक सामाजिक विफलता है